CPR क्या है? जानें सही तरीका और जीवन बचाने में इसकी भूमिका
CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) एक आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक रक्त पंप करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति को कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है। CPR के माध्यम से छाती पर दबाव देकर शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद की जाती है, जिससे मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक कुछ रक्त पहुँचता रह सकता है।
समय पर CPR शुरू करना और उपलब्ध होने पर AED (Automated External Defibrillator) का उपयोग करना जीवन बचाने की संभावना बढ़ा सकता है।
CPR कब देना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से साँस न ले रहा हो या केवल हाँफ रहा हो, तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाएँ और CPR शुरू करें।
यदि व्यक्ति बेहोश है लेकिन सामान्य रूप से साँस ले रहा है, तो CPR शुरू करने के बजाय उसकी साँस पर निगरानी रखें और आपातकालीन सहायता के निर्देशों का पालन करें।
CPR कैसे करें? सही तरीका
वयस्क व्यक्ति में CPR देने के लिए इन चरणों का पालन करें:
1. स्थिति की जाँच करें: सुनिश्चित करें कि आसपास का वातावरण सुरक्षित है। व्यक्ति के कंधे पर हल्के से थपथपाकर प्रतिक्रिया देखें।
2. आपातकालीन सहायता बुलाएँ: यदि व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है और सामान्य साँस नहीं ले रहा है, तो भारत में 112 पर कॉल करें या किसी दूसरे व्यक्ति से मदद बुलाने को कहें। उपलब्ध हो तो AED मँगवाएँ।
3. छाती पर दबाव दें: व्यक्ति को पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएँ। एक हाथ की हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीचोंबीच रखें और दूसरा हाथ उसके ऊपर रखें।
4. सही गति और गहराई बनाए रखें: वयस्क की छाती को लगभग 5–6 सेंटीमीटर तक दबाएँ। प्रति मिनट 100–120 दबाव दें। हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह वापस सामान्य स्थिति में आने दें।
5. CPR जारी रखें: यदि आप प्रशिक्षित हैं और साँस देने में सक्षम हैं, तो 30 छाती दबाव के बाद 2 साँस दें। यदि प्रशिक्षित नहीं हैं, तो लगातार छाती पर दबाव देते रहें और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।
6. AED का उपयोग करें: मशीन उपलब्ध होने पर उसे चालू करें और उसके निर्देशों का पालन करें। CPR तब तक जारी रखें जब तक व्यक्ति सामान्य रूप से साँस लेने न लगे, प्रशिक्षित सहायता न पहुँच जाए या आपके लिए जारी रखना संभव न रहे।
CPR और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?
हार्ट अटैक में हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुँचाने वाली धमनी में रुकावट हो सकती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन दोनों स्थितियाँ अलग हैं।
हर हार्ट अटैक के मरीज को CPR की आवश्यकता नहीं होती। CPR तब जरूरी होता है जब व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा हो और सामान्य रूप से साँस न ले रहा हो।
CPR क्यों महत्वपूर्ण है?
कार्डियक अरेस्ट में मस्तिष्क और अन्य अंगों तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त की आपूर्ति रुक सकती है। जल्दी CPR शुरू करने से रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है, जब तक कि उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए।
CPR एक महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कौशल है, जिसे अधिक से अधिक लोगों को सीखना चाहिए। कार्डियक अरेस्ट की आशंका होने पर तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाएँ और बिना देरी के छाती पर दबाव शुरू करें। सही प्रशिक्षण और समय पर कार्रवाई किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. सरिता राव इंदौर स्थित वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं और अपोलो हॉस्पिटल्स में कैथ लैब की निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एंजियोप्लास्टी, जटिल हृदय संबंधी प्रक्रियाएँ और हृदय रोगों का प्रबंधन शामिल है। हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, जोखिम के संकेतों की पहचान और कार्डियक अरेस्ट जैसी आपातकालीन स्थितियों में समय पर सहायता के महत्व को समझना हृदय संबंधी देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नोट: यह लेख सामान्य शैक्षिक जानकारी के लिए है। CPR की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रमाणित प्रशिक्षक से लेना उपयोगी है।

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